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New 100 Plus Hindi Shayari 2019 – Hindi Love Shayari

 
New hindi Shayari 2018

 New Hindi Romantic Shayari

 

मत कीजिए हमे ,
भुलने की नाकाम कोशिश ,
आपका यूं हारना ,
कतई मंजुर नहीं मुझे !!!

तेरी तस्वीर में अब ज़िन्दगी ढूंढ रहा हूँ
ख़्याले-आग़ोश में गिरफ़्तगी ढूंढ रहा हूँ।

ए कैसा हादसा है, जो भुला न सका मैं
आग़ोशे-मर्ग में ख़ुदसुपुर्दगी ढूँढ रहा हूँ।

डूब न सका दर्या में, कश्ती भी तो नहीं
अश्क में ही डूब कर तश्नगी ढूंढ रहा हूँ।

किए थें हमने वादे, साथ साथ मरने की
कुंजे-मज़ार ही तेरा पाइंदगी ढूंढ रहा हूँ।

निहाँ है तबस्सुम तेरा लिए सोज़िशे-दिल
सुर्ख़ आँखों में तेरी ताबिंदगी ढूंढ रहा हूँ।

*जिनके पास अपने हैं*,
*वो अपनों से झगड़ते हैं*…
*जिनका कोई नहीं अपना*,🍁💕
*वो अपनों को तरसते हैं*..।
*कल न हम होंगे न गिला होगा।*
*सिर्फ सिमटी हुई यादों का सिलसिला होगा।*🍁💕
*जो लम्हे हैं चलो हंसकर बिता लें।*
*जाने कल जिंदगी का क्या फैसला होगा।*

​​सपने सारे तोडकर बेठे है,, दिल के अरमान छोड़कर बेठे हैं!!​​
​​ना कीजीए हमसे वफा की बाते ,, अभी अभी दिल के टुकड़े जोड़ कर बेठे है!!​​

मैनु तेरा शबाब ले बैठा,
रगं गौरा गुलाब ले बैठा,

किन्नी- बीती ते किन्नी बाकी है,
मैनु एहो हिसाब ले बैठा,

मैनु जद वी तूसी तो याद आये,
दिन दिहादे शराब ले बैठा,

चन्गा हुन्दा सवाल ना करदा,
मैनु तेरा जवाब ले बैठा,

वक़्त का सितम….तो देखिये ज़नाब….
खुद गुज़र गया…हमें वहीँ छोड़ कर….!!!!

मिज़ाज-ए-इश्क़….होम्योपैथिक है उसका……
मुद्दत से बस….मीठी गोली दिए जा रहा है….!!!

घड़ी की सूईयों सा किरदार है मेरा …
माना वक़्त बेवक़्त मिलता हूँ …
लेकिन जुड़ा सबसे रहता हूँ !!!

रोग ऐसे भी ग़म-ए-यार से लग जाते हैं
दर से उठते हैं तो दीवार से लग जाते हैं

इश्क़ आग़ाज़ में हल्की सी ख़लिश रखता है
बाद में सैकड़ों आज़ार से लग जाते हैं

बेबसी भी कभी क़ुर्बत का सबब बनती है
रो न पाएँ तो गले यार से लग जाते हैं

दाग़ दामन के हों दिल के हों कि चेहरे के ‘फ़राज़’
कुछ निशाँ उम्र की रफ़्तार से लग जाते हैं

मोहब्बत की तलाश में निकले हो तुम अरे ओ पागल,
मोहब्बत खुद तलाश करती है जिसे बर्बाद करना हो।

आज किसी की दुआ की कमी है,
तभी तो हमारी आँखों में नमी है,
कोई तो है जो भूल गया हमें,
पर हमारे दिल में उसकी जगह वही है। 💔 😢

कुछ ग़म ही तो है, कुछ दर्द ही तो है
तेरी याद में अब कुछ फ़र्याद ही तो है।

है सफ़र दूर का, दिखता नहीं मंज़िल
तन्हा सफ़र में कुछ इर्तियाद ही तो है।

भटक गया हूँ राह में रहनुमा भी नहीं
राहे-ज़िन्दगी में कुछ उम्मीद ही तो है।

मालूम नहीं है मुझे कब तक है जुदाई
विसाल में अब कुछ अस्दाद ही तो है।

न है गिला न है शिकवा न है रंजो-ग़म
ख़्वाबों में तेरी ख़्वाहिशे-दीद ही तो है।

कभी इतना मत मुस्कुराना ,
की नजर लग जाए जमाने की ,
हर आँख मेरी तरह ,
मोहब्बत की नही होती….!!

नदी से किनारे छूट जाते है आसमान से तारे टूट जाते है
जिन्दगी की राह में अक्सर ऐसा होता है
जिसे हम दिलसे चाहते है वही हमसे रूठ जाते है !!

देखता रहता हूँ मैं तुझे ख़्वाबों में
याद करता रहता हूँ मैं ख़्यालों में।

गुज़ार देंगे रात, लेकर सिसकियाँ
सुबह नौ, यूँ भर लो मुझे बाहों में।

बे-नियाज़ हो गए हैं, हक़ीक़त से
रहने दो मुझे अब, यूँ तन्हाइयों में।

नींद आती नहीं है क्यूँ रात भर यूँ
न छुपाओ मुझे फिर से गेसूओं में।

भटक रहा हूँ, लिए शिकस्तादिल
रहने दो मेरे आँखों को अश्कों में।

एक ही ख़्याल बार बार दिल में आता है क्यों
याद में उनकी आँखों से अश्क बहता है क्यों।

दिल-ए-नादाँ को कोई समझाए आके फिर से
आग़ोश-ए-ग़म में भी, ए दिल तड़पता है क्यों।

मैंने चाहा था चश्म-ए-इल्तेफ़ात ग़मे-जुदाई में
ख़्वाहिशे-वस्ल में भी, ए दिल मचलता है क्यों।

हमने निभाई थी, रस्म-ओ-रह-ए-दोस्ती मगर
तूफ़ान-ए-हवादिस में भी, दिल डरता है क्यों।

अपने दिल का दाग़-ए-महरूमी कैसे छुपाऊँ
बे-रौशनी घर है फिर भी अंधेरा रहता है क्यों।

गर ज़िन्दगी में, ख़ुशी और ग़म न होता
तो हमें भी राज़े-ज़िंदगी मालूम न होता।

पराए भी ज़िंदगी में अपना बन जाते हैं
न बिछड़ते तो, ज़िन्दगी में गुर्म न होता।

गोशबर आवाज़ थें हम तेरे इन्तज़ार में
इज़्तिराब में फिर से चश्मे नम न होता।

मुसाफ़िर बन गया हूँ मैं, ख़ारज़ारों का
सफ़र-ए-चमन में, ऐसे अंजाम न होता।

डूब चूका हूँ मैं, बादा-ए-सर जोश में यूँ
शिकस्तादिल में फिर से ज़ख़्म न होता।

ताक़त और पैसा ज़िन्दगी के फल हैं*
*परिवार और मित्र जिन्दगी की जड़ हैं*
*हम फल के बिना अपने आप को चला सकते हैं*
*पर*
*जड़ के बिना खड़े नहीं हो सकते……..!!*

मैं कैसे कहूं तुझको मुसलमान बतादे
शैतान भी है दिल में तेरे और खुदा भी


तू
इज़हारे इश्क़ है
तो
मै एतबारे मोहब्बत हूँ
दिलों में
रहती दबी दबी
मै वो मासूम सी चाहत हूँ

एक ही ख़्याल बार बार दिल में आता है क्यों
याद में उनकी आँखों से अश्क बहता है क्यों।

दिल-ए-नादाँ को कोई समझाए आके फिर से
आग़ोश-ए-ग़म में भी, ए दिल तड़पता है क्यों।

मैंने चाहा था चश्म-ए-इल्तेफ़ात ग़मे-जुदाई में
ख़्वाहिशे-वस्ल में भी, ए दिल मचलता है क्यों।

हमने निभाई थी, रस्म-ओ-रह-ए-दोस्ती मगर
तूफ़ान-ए-हवादिस में भी, दिल डरता है क्यों।

अपने दिल का दाग़-ए-महरूमी कैसे छुपाऊँ
बे-रौशनी घर है फिर भी अंधेरा रहता है क्यों।

नहीं नजर आते
आसमान में तारे
प्रदूषण बहुत है
बिखरे पड़े हैं
तारे जमीं पर

तेरी आँखों के जादू से तू ख़ुद नहीं है वाकिफ़;
ये उसे भी जीना सीखा देता जिसे मरने का शौक़ हो

मैंने बहुत-कुछ,
लिखा तुम्हारे लिए पर कभी कह नहीं पाया…
की ये तुम्हारे लिए है,
मेरे लफ्जों की महक और मेरे इश्क़ की गहराई तेरी चाहत की हल्की-हल्की फुहारों मे है…|

अपने तेवर तो सँभालो, कि कोई ये न कहे ।
दिल बदलते हैं, तो चेहरे भी बदल जाते हैं ।।

तजुर्बा कहता है मोहब्बत से किनारा कर लूँ…
और दिल कहता है कि ये तज़ुर्बा दोबारा कर लूँ !!

बेरंग तेरी तस्वीर में ही, कुछ रंग डाला मैंने
ख़ता मुआफ़ करना नींद से जगा डाला मैंने।

लिए दर्द-ए-लाज़वाल, भटक रहे हैं दर दर
ग़म-ए-हिज्र में, तुझे बेक़रार कर डाला मैंने।

शरार भड़क रहे हैं यूँ ज़मीं से ता-ब-फ़लक
अन्धेरा था तेरे घर में, शमा जला डाला मैंने।

ज़र्ब-ए-हवादिस में खो जाते हैं चलते चलते
आग़ोश-ए-हादसात में तुझे छुपा डाला मैंने।

ख़ुदकुशी कर रहे हैं, बिल-इकसात बारहा
कुंजे-मज़ार तेरे ही आशियाँ बना डाला मैंने।

हुए बदनाम मगर फिर भी न सुधर पाए हम,
फिर वही शायरी, फिर वही इश्क, फिर वही तुम

दुख देकर सवाल करते हो
तुम भी गालिब कमाल करते हो
देख कर पूछ लिया हाल मेरा
चलो कुछ तो ख्याल करते हो
मरना चाहिए तो मर नहीं सकते
तुम भी जीना मुहाल करते हो
अब किस किस की मिसाल दूँ तुम्हे
हर सितम बेमिसाल करते हो।।

*🙏🏻क्या खूब कहा है किसी ने..*
*गंदगी तो, देखने वालों की,*
*’नज़रों 👀में होती है..’*

*वरना कचरा चुनने वालों को तो,*
*”उसमें भी रोटी नज़र आती है.*👌🏻💐🙏🏻

पति: कहाँ गायब थी 4 घंटे से?
बीवी: मॉल में गयी थी, शॉपिंग करने.
पति: क्या क्या लिया?
बीवी: एक हेयर क्लिप और 45 सेल्फी…😆😆😆😆


हमें कहाँ मालूम था क़ि इश्क़ होता क्या है..
बस एक ‘तुम’ मिले और ज़िन्दगी मुहब्बत बन गई..

लाज़मी है मेरा बेमिसाल होना,
एक तो मैं ख्याल हूं और वो भी तुम्हारा।

तजुर्बा नाकाम मोहब्बत का भी जरूरी है जिंदगी में,
वर्ना दर्द में मुस्कुराने का हुनर कहाँ से आएगा…!!!

!!! हम कुछ ज्यादा नहीं जानते
#मोहब्बत के बारे में.
बस तुमहे #सामने पाकर
मेरी #तलाश खत्म हो जाती है.

एहसान ना जताए हमें रब के वास्ते
हमने उतार फेंकी दी हैं ज़नजीर आपकी

तेरी आँखों से अश्क, बहता हुआ देखा था मैंने
दिल में इक दर्द सा उभरता हुआ देखा था मैंने।

न था गिला न था शिकवा, न था कोई रंजो-ग़म
तेरे प्यार में ख़ुद को, जलता हुआ देखा था मैंने।

इज़्तिराब में हम हैं जब तक है ए हस्ती अपनी
तन्हाई में तुझे भी सिसकता हुआ देखा था मैंने।

बनाए थें हमने राह ज़िन्दगी भर चलने के लिए
न थें हम, तन्हा तुझे गुज़रता हुआ देखा था मैंने।

अब तो तेरी तस्वीर में ही ढूंढता हूँ नूर-ए-नज़र
तस्वीर में भी तुझे मुस्कुराता हुआ देखा था मैंने।

*💞ज़िंदगी तो सभी के लिए*
*एक रंगीन किताब है ..!*
*फर्क बस इतना है कि,*
*कोई हर पन्ने को दिल से*
*पढ़ रहा है; और*
*कोई दिल रखने के लिए*
*पन्ने पलट रहा है।*
*हर पल में प्यार है*
*हर लम्हे में ख़ुशी है ..!*
*खो दो तो यादें हैं,*
*जी लो तो ज़िंदगी है💞*
💕 *Life is very beautiful*💕

हरसू दिखाई देते है वो जल्वाग़र मुझे…
क्या क्या फ़रेब देती है मेरी नज़र मुझे…!
( हरसू=हर तरफ़ ) ( जल्वाग़र=प्रेमिका/प्रेमी )

डाला है बेख़ुदी ने अज़ब राह पर मुझे…
आँखे है और कुछ नही आता नजर मुझे…..!

दिल ले के मुझसे , देते हो दाग़-ए-ज़िगर मुझे…
ये बात भूलने की नही उम्र भर मुझे….!

आया ना रास नाला-ए-दिल का असर मुझे…
अब तुम मिले तो कुछ नही आता नज़र मुझे…!
( नाला-ए-दिल= दिल की पुकार, चीत्कार )

कभी वीराना कभी गुलशन कितने किरदार बदलेंगे..
बहारो नाज़ करो हम सदाबहार फूल है सिर्फ खिलते मिलेंगे..

न पूछो मुझसे यूँ, फिर कब मिलोगे
फूलों की तरह यूँ फिर कब खिलोगे।

थे हम भी कभी तो शमा और चराग़ .
ख़ाना-ए-दिल में यूँ फिर कब जलोगे।

साँसे है मगर, रूठी है धड़कन मेरी
सदा-ए-दर्द यूँ मेरी फिर कब सुनोगे।

दिखता नहीं है अश्क भरी आँखों से
ज़िन्दगी में मेरी रंग फिर कब भरोगे।

राह है लम्बी और मंज़िल भी नहीं है
लेके मुझे तेरे साथ फिर कब चलोगे।

“साथ‬” दो हमारा
“‎जिना‬” हम ‎सिखायेँगे‬💞
“मंजिल‬” तुम पाऔ “‎रास्ता‬” हम बनायेँगे………… 💞
“खुश‬” तुम रहो “खुशिया‬” हम
दिलायेँगे…………💞
तुम बस “#‪#‎दोस्त‬” बने रहो “#‪#‎दोस्ती‬” हम
#‪#‎निभायेँगे‬………….
🌹 🌹

*मैं तो वक्त से हारकर*
*सर झुकाएँ खड़ा था,*
*सामने खड़े कुछ लोग*
*ख़ुद को बादशाह समझने लगे…*

आज फिर दिल में दर्द उभर रहा है आहिस्ता आहिस्ता
आँखों में फिर से अश्क भर रहा है, आहिस्ता आहिस्ता।

आलमे-ग़म-ए-हिज्र है, क्या सुनाऊँ मैं इस संग दिल को
आईने में अक्स-ए-जाँ, बिखर रहा है आहिस्ता आहिस्ता।

सर झुका कर शबो-रोज़ इबादत करते हैं तेरी तस्वीर को
बेख़ुदी में भी तुझे दिल पुकार रहा है, आहिस्ता आहिस्ता।

यह अब्र-ए-मिज़ा भी कभी नहीं बरसते बादलों की तरह
तपिशे-दिल में भी शरर मंशूर रहा है आहिस्ता आहिस्ता।

अब तो ख़्वाबों में ही इन्तज़ार कर रहे हैं उनके आने की
यह बेक़रार दिल कोहवक़ार रहा है, आहिस्ता आहिस्ता।

जिंदगी बड़ी अजीब सी हो गयी है,
जो मुसाफिर थे वो रास नहीं आये,
जिन्हें चाहा वो साथ नहीं आये।

Jinki Yaad Hai Dil Me Nishaani Ki Tarah
Woh To Bhool Gaye Hume Kahani Ki Tarah

तेरे हाथ की मैं वो लकीर बन जाऊं सिर्फ मैं ही तेरा मुकद्दर तेरी तक़दीर बन जाऊं
इतना चाहूँ मैं तुम्हें कि तू हर रिश्ता भूल जाये और सिर्फ मैं ही तेरे हर रिश्ते की तस्वीर बन जाऊं !!

जिन्दगी का एक और वर्ष कम हो चला,
कुछ पुरानी यादें पीछे छोड़ चला..

कुछ ख्वाइशें दिल में रह जाती हैं..
कुछ बिन मांगे मिल जाती हैं ..

कुछ छोड़ कर चले गये..
कुछ नये जुड़ेंगे इस सफर में ..

कुछ मुझसे बहुत खफा हैं..
कुछ मुझसे बहुत खुश हैं..

कुछ मुझे मिल के भूल गये..
कुछ मुझे आज भी याद करते हैं..


कुछ शायद अनजान हैं..
कुछ बहुत परेशान हैं..

कुछ को मेरा इंतजार हैं ..
कुछ का मुझे इंतजार है..

कुछ सही है
कुछ गलत भी है.
कोई गलती तो माफ कीजिये और
कुछ अच्छा लगे तो याद कीजिये।

जम रही है महफ़िल तो इसे जमने दो यारो
मैं जहाँ था मुझे फिर से वहीं रहने दो यारो।


सुनता नहीं है कोई जहाँ में मेरा अफ़साना
चश्मेतर मुझे कभी, मर्सिए सुनाने दो यारो।

मिल न पाउँगा अब उनसे राहे-ज़िन्दगी में
ख़यालों में ही कभी, उनसे मिलने दो यारो।

सो रही है वह, उसे अब जगा नहीं सकता
आग़ोशे-मौत में मुझे भी तो, सोने दो यारो।

मिलता नहीं है तबीबे-जाँ, ज़ख़्मे-दिल का
जो था हबीब मेरा, उनको बुलाने दो यारो।

​उन्हें शायद मुझपर ऐतबार भी नहीं,,​
​लड़ते हैं और हाथ में तलवार भी नहीं,,​

​कहते हैं बहोत प्यार करते हैं वो हमसे,,​
​करते है कभी प्यार का इजहार भी नहीं,,​

​बेक़रारी बढ़ाते हैं वो हद से ज्यादा मेरी,,​
​वो खुद जाने क्यूँ इतने बेक़रार भी नहीं,,​

​उनका इंतजार रहता है हमको हर पल,,​
​उन्हें शायद अब मेरा इंतजार भी नहीं,,​

​वो रहते हैं अब बेज़ार से हमसे शायद,,​
​करते है मगर हमको कभी इंकार भी नहीं,,​

बेताब दिल की तमन्ना यही है
तुम्हें चाहेंगे तुम्हें पूजेंगे
तुम्हें अपना ख़ुदा बनाएँगे, बेताब …

सूने सूने ख़्वाबों में जब तक तुम न आये थे
ख़ुशियाँ थीं सब औरों की, ग़म भी सारे पराये थे
अपने से भी चुपाई थी धड़कन अपने सीने की
हम को जीना पड़ता था, ख़्वाहिश कब थी जीने की
अब जो आके तुम ने हमें जीना सिखा लिया है
चलो दुनिया नई बसाएँगे, बेताब …

भीगी भीगी पलकों पर सपने इतने सजाए हैं
दिल में जितना अँधेरा था, उतने उजाले आए हैं
तुम भी हम को जगाना ना, बाहों में जो सो जाएँ
जैसे ख़ुश्बू फूलों में तुम में यूँ ही खो जाएँ
पल भर किसी जनम में कभी छूटे ना साथ अपना
तुम्हें ऐसे गले लगाएँगे, बेताब …

वादे भी हैं, क़समें भी, बीता वक़्त इशारों का
कैसे कैसे अरमाँ हैं, मेला जैसे बहारों का
सारा गुलशन दे डाला, कलियाँ और खिलाओ ना
हँसते हँसते रो दें हम, इतना भी तो हँसाओ ना
दिल में तुम्हीं बसे हो, रहा आँचल वो भर चुका है
कहाँ इतनी ख़ुशी छुपाएँगे, बेताब …

खो दिया है उनको मगर ख़ुद को खो नहीं पाया
याद कर कर के उन्हें ही रात भर सो नहीं पाया।

तलाश कर रहे हैं उन्हें, राहे-ज़िन्दगी में अपनी
अश्क है आँखों में फिर भी, कभी रो नहीं पाया।

मिलते रहते हैं हम उनसे, अब तो ख़्यालों में ही
हक़ीक़त में फिर उनसे मुलाक़ात हो नहीं पाया।

महकते रहे हैं गुल चमन में लिए याद उनके ही
काँटे भरी ज़िन्दगी में अपनी, गुल बो नहीं पाया।

आलम-ए-रंग-ओ-बू तमाम डूब गए हैं यूँ दर्द में
ख़्यालों में मिलकर भी कभी, उन्हें गो नहीं पाया।

मोहब्बत जितनी नई
तवज्जो उतनी ज्यादा….
जितनी पुरानी
उतनी बेरुखी…….
गजब का रिवाज चला है इस दौर-ए-ईश्क में!!


पी लेंगे हम अश्क ही, आब मिले न मिले
मर जाएंगे तेरी याद में क़ल्ब मिले न मिले।

गुज़र रही है ज़िंदगी यूँ ही, मानिन्दे-हुबाब
शब तो कट जाएगी माहताब मिले न मिले।

ज़िंदगी क्या है, आके बता दे कोई मुझे भी
डूब जाएंगे दर्या में ही, सैलाब मिले न मिले।

सुना रहा हूँ मर्सिए, जो है अपना अफ़साना
ग़म नहीं है अब महफ़िले-शब मिले न मिले।

देखता रहता हूँ तेरा ही रू तेरे ही तस्वीर में
विसाल है तेरी रूह से क़ालिब मिले न मिले।


अश्क भरी आँखों से यूँ कोई ख़्वाब दिखता नहीं
बारिश-ए-गिरिया में यूँ कहीं सैलाब दिखता नहीं।

ज़िन्दगी है अपनी मगर डोर है औरों के हाथों में
मौत की आग़ोश में यूँ ख़ाना ख़राब दिखता नहीं।

रोना है ज़िन्दगी भर, फिर भी कब तक रोएँ हम
ख़ाना-ए-दिलबर का दूर तक, बाब दिखता नहीं।

तेरी तस्वीर से गुफ़्तगू करते रहते हैं हम लेकिन
तकल्लुफ़ में तेरे रुख़्सार पे नक़ाब दिखता नहीं।

छोड़ दी है आहें भरना और रोना भी मैंने अब यूँ
शब-ए-महताब है फिर भी महताब दिखता नहीं।

ये ख्यालों की जमीं जज़्बातों की हवा
चाँद सितारों के तले है तन्हाई की सदां।।
गमों की दास्ताँ है ये जिन्दगी मेरे दोस्त
चलो कोई और बात करें जिन्दगी से जुदा।।
यूँ तो वो हंस दिए दास्ताने जिंदगी सुनकर
हमको कुछ भा गयी अश्क छिपाने की अदा।।
उनकी झुकी नज़रों ने बयाने मुहब्बत कर दी
अब तो हर अदा पर है ये दिलोजान फ़िदा।।
बेइंतेहा मुहब्बत करते हैं “अभि” उनसे
उन लबों पर चिराग़-ए- मुहब्बत रौशन कर ऐ खुदा।।

कोई और इल्जाम है तो वो भी देते जाओ…
हम तो पहले से ही बुरे थे थोड़े और सही…!!

 
 
 
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